बक्सर : यह दुर्दशा उस जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की है जहां से लोकसभा चुनाव जीतने वाले सांसद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में राज्यमंत्री हैं और बड़े-बड़े भाषण देने से सुर्खियों में रहते हैं।
रविवार को जिस गर्भवती को इलाज के लिए एंबुलेंस नहीं देने पर उसका पति गोद में उठाकर उसे अस्पताल ले गया था, उसकी इलाज में देरी के कारण सोमवार को पटना में उसकी मौत हो गई।
गरीब और बेबस पति अस्पतालों के चिकित्सकों से गुहार लगाता रहा, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। सिविल सर्जन डॉ. उषा किरण वर्मा से बात हुई तो उन्होंने मामले की जानकारी ही नहीं होने की बात कही। फिर बोलीं ऐसा हुआ है तो जांच कराएंगे।
दरअसल, बक्सर के नया भोजपुर गांव स्थित अनुसूचित बस्ती के सचिन कुमार राम की पत्नी नीलम देवी को रविवार की सुबह प्रसव पीड़ा शुरू होने पर पहले एंबुलेंस वाले को फोन किया। लेकिन कोई एंबुलेंस चालक कोरोना प्रभावित उसके गांव नया भोजुपर का नाम सुनकर आने को तैयार नहीं हुआ।
इस परिस्थिति में तड़प रही पत्नी को गोद में लेकर किसी तरह वह अस्पताल पहुंचा। वहां अस्पताल कर्मचारियों ने घंटों बैठाए रखा। प्रसव पीड़ा से महिला तड़प रही थी। पति अस्पताल के चिकित्सकों और कर्मियों से हाथ जोड़-जोड़कर इलाज करने की फरियाद कर रहा था, लेकिन कर्मचारी इसे नजरअंदाज करते रहे।
काफी देर बाद कागजी कार्रवाई का कोरम पूरा कर महिला को जिला मुख्यालय के सिटी अस्पताल में रेफर कर दिया गया। पति ने सिटी अस्पताल ले जाने के लिए अधिकारियों से गुहार लगाई तो एंबुलेंस मिली जिसके बाद वह पत्नी को लेकर बक्सर के सिटी हॉस्पिटल पहुंचा। यहां बिना मरीज को एंबुलेंस से उतारे सदर अस्पताल ले जाने का फरमान सुना दिया गया।
प्रसव पीड़ा से कराह रही पत्नी को लेकर वह सदर अस्पताल पहुंचा। वहां हालत बिगड़ने का हवाला देकर बिना इलाज किए पटना रेफर कर दिया गया। इस भागमदौड़ में काफी स्क्तस्राव भी हो चुका था। पीएमसीएच में सोमवार की सुबह पीड़िता की मौत हो गई।
ब्यूरो रिपोर्ट बिहार नाउ
