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बिहार में इंजीनियर के ठिकानों पर रेड, 300 करोड़ की संपत्ति मिली, EOU की बड़ी कार्रवाई …

पटना: बिहार की राजधानी पटना समेत तीन जिलों में आर्थिक अपराध इकाई ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम (BSEIDC) के कार्यपालक अभियंता प्रमोद कुमार के खिलाफ छापेमारी शुरू कर दी है. उन पर अपनी ज्ञात आय से 309.61% अधिक संपत्ति जमा करने का आरोप है.

EOU के अधिकारियों ने बताया कि छापेमारी के बाद मामले की और अधिक जानकारी सार्वजनिक की जाएगी.. .आर्थिक अपराध इकाई ने प्रेस नोट जारी कर बताया है कि ”EOU की एक टीम सीतामढ़ी, तीन टीमें सहरसा और दो टीमें पटना में छापेमारी कर रही हैं.

यह कार्रवाई पटना की विशेष अदालत से प्राप्त तलाशी वारंट के बाद की गई है. छापेमारी के दौरान प्रमोद कुमार के आवासीय परिसरों और अन्य संपत्तियों की जांच की जा रही है.” EOU के अधिकारियों ने बताया कि छापेमारी के बाद मामले की और अधिक जानकारी सार्वजनिक की जाएगी

दरअसल आर्थिक अपराध इकाई को शिकायत मिली थी कि BSEIDC के कार्यपालक अभियंता प्रमोद कुमार ने अपनी वैध आय से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जांच में यह बात सामने आई कि उनकी आय के मुकाबले उनके पास 309.61% अधिक संपत्ति है, जो भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत गंभीर अपराध माना जाता है. इसके बाद EOU ने आर्थिक अपराध थाना में प्रमोद कुमार के खिलाफ मामला दर्ज करवाया.

प्रमोद कुमार के खिलाफ आर्थिक अपराध थाना में कांड संख्या-13/2025, दिनांक 9 जुलाई 2025 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 13(2) और धारा 13(1)(बी) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है. यह मामला सरकारी अधिकारी द्वारा अनुचित तरीके से संपत्ति जमा करने से जुड़ा है.

जांच में क्या आया सामने?: प्रारंभिक जांच में पता चला है कि प्रमोद कुमार ने अपनी आधिकारिक आय से कई गुना अधिक संपत्ति बनाई है. निगरानी एजेंसियों को पहले से ही इस बारे में संदेह था और कई महीनों से उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी. अब EOU यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इतनी बड़ी संपत्ति कैसे अर्जित की गई और इसमें किन-किन लोगों की मिलीभगत शामिल है.

अन्य लोगों के शामिल होने का शक: छापेमारी के बाद EOU द्वारा जब्त किए गए दस्तावेजों और सबूतों का विश्लेषण किया जाएगा. अगर आरोप सिद्ध होते हैं, तो प्रमोद कुमार के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. इस मामले में और भी नाम सामने आ सकते हैं, क्योंकि ऐसे मामलों में अक्सर कई लोगों का नेटवर्क शामिल होता है.

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