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पटना के “Don Bosco School” के फर्जी कारनामे ने खोले नीतीश सरकार के भ्रष्टाचार की पोल !… अधिकारी के निर्गत पत्र के महीनों बीत जाने के बावजूद कार्रवाई नहीं, सीनियर एडवोकेट ने उठाए सवाल ? …

बिहार में भ्रष्टाचार को लेकर सरकार के तमाम दावो के बीच राजधानी पटना की एक खबर ने सच सामने ला दी है ..यानी नीतीश सरकार की पोल खोल दी है ..

पटना का सबसे बड़ा व प्रतिष्ठित स्कूलों में शुमार दीघा स्थित डॉन बासको स्कूल इन दिनों विवादों में है और विवाद शिक्षा से जुड़ा नहीं, बल्कि इस स्कूल के अवैध निर्माण को लेकर है .. अवैध निर्माण को लेकर जो सच सामने आया है, उसने न सिर्फ स्कूल प्रबंधन बल्कि सरकार को सवालों के घेरे में ला दी है …

बिहार के जाने माने व पटना हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट मणिभूषण सेंगर के मुताबिक, पटना का दीघा स्थित डॉन बॉसको स्कूल के लिए जमीन बिहार हाउसिंग बोर्ड की ओर से कभी आवंटित नही की गई है, ऐसा विभाग का कहना है.. बावजूद डॉन बॉसको स्कूल का निर्माण अवैध तरीके से किया गया …

डॉन बॉसको स्कूल के फर्जी कारनामे और नीतीश सरकार के भ्रष्टाचार अधिकारियों का गठजोड़ उस वक्त सामने आ गया, जब पटना हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट मणिभूषण सेंगर ने इसके लिए  सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांग कर तमाम संबंधित विभाग के अधिकारियों और मुख्यमंत्री तक शिकायत का आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की, जिसके बाद संबंधित विभाग के कार्यपालक अभियंता हरकत में आए और उक्त कार्रवाई की … लेकिन फिर मामला ठंडे बस्ते में चला गया …

बिहार राज्य आवास बोर्ड की ओर से डॉन बॉसको स्कूल को आवंटित जमीन को लेकर जो जानकारियां साझा की गई है, वो पॉंव तले जमीन खिसक जाने के बराबर है …

मांग की गई सूचना : 

पटना के दीपा मौजा के आशियाना दीघा रोड में अरस्थित डॉन बास्को अकैडमी, बिहार राज्य आवास बोर्ड के जिस अधिग्रहित भूखंड पर निर्मित है उस भूखंड को डॉन बास्को अकैडमी को आवंटित किया गया है या नहीं, अगर किया गया है तो आवंटन की प्रति उपलब्ध कराते हुए इससे संबंधित सूचना दी जाए। और यदि आवंटन नहीं किया गया है तो इसके विरुद्ध क्या कार्रवाई किस तिथि में की गई इसकी सूचना सूची वार एवं विधि बार उपलब्ध कराने की कृपा की जाए

उपलब्ध करायी गई सूबना  : 

पटना के दीघा में अवस्थित डीन बास्को एकेडमी बिहार राज्य आवास बोर्ड के अधिग्रहित भूमि पर है और 40-50 वर्षों पूर्व से है। डॉन बास्को एकेडमी निजी संस्था है। कार्यपालक अभियंता कार्यालय द्वारा अभी तक किसी निजी संस्था को जमीन आवंटन नहीं किया गया है।

मामला यहीं नहीं रुका, अब आगे बिहार राज्य आवास बोर्ड के कार्यपालक अभियंता ने संबंधित विषयों को लेकर डॉन बॉसको स्कूल को पत्र लिखते हुए दिए गए तय समय तक तमाम कागजातों के साथ मौजूद होने को कहा, नहीं तो कानून संगत कार्रवाई का अल्टीमेटम भी दिया …

बावजूद डॉन बॉसको स्कूल प्रबंधन न तो इस पत्र को गंभीरता से लिया और न ही कार्यपालक अभियंता के आदेश के महीनों बीत जाने के बाद अभी तक कोई उचितम कानूनी कार्रवाई विभाग और सरकार की ओर‌  की गई है …

बिहार राज्य आवास बोर्ड के इस आदेश और स्कूल प्रबंधन की सिथिलता ने नीतीश सरकार के भ्रष्टाचार पर जीरों टॉलरेंस को चुनौती दे दी है…

बिहार राज्य आवास बोर्ड के कार्यपालक अभियंता ने 25 जनवरी 2025 को स्कल प्रबंधन को पत्र लिखा था, बावजूद 6 महीने बीत जाने के बाद भी कभी तक कार्रवाई नहीं हुई है… बिहार राज्य आवास बोर्ड के कार्यपालक अभियंता ने पत्र में लिखा कि

“उपर्युक्त विषय के संबंध में कहना है कि खेसरा सं०-2234, 2235 एवं 2236 बिहार राज्य आवास बोर्ड के अर्जन में है। उक्त भूखंड भूमि अर्जन 1894 के तहत PLA No. 94/73, 71/4 दिनांक-20.02.1976 से गजट प्रकाशित है। बिहार राज्य आवास बोर्ड की 132वीं बैठक दिनांक-15.02.1990 के अन्यान्य कार्यालवली के कडिका-1 में आपको आवंटन करने का निर्णय माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद लिया जाएगा जो अभी तक लंबित है। उक्त खेसरा का आवंटन आपके विद्यालय के नाम से नहीं किया गया है। फिर भी अवैध रूप से विद्यालय भवन निर्मित है। यदि आपके पास उक्त भूमि का बिहार राज्य आवास बोर्ड द्वारा आवंटन आदेश या अर्जन मुक्त होने से संबंधित प्रमाण हो तो संबंधित दस्तावेज के साथ अधोहस्ताक्षरी को पत्र प्राप्ति के पश्चात् तीन दिनों के अंदर उपलब्ध कराए। अन्यथा प्राथमिकी दर्ज कराते हुए अवैध निर्माण को हटाने हेतु विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी साथ ही इसकी सूचना ICSE Board, नई दिल्ली को भी दी जाएगी”…

कृपया इसे सर्वोच्च प्राथमिकता दें….

इस घटनाक्रम के अनुसार, स्कूल प्रबंधन और भ्रष्ट अधिकारियों की गठजोड़ ने नीतीश सरकार के “सु”शासन पर‌ सवाल खड़े कर दिए हैं.. इस घटनाक्रम ने कई सवालों को जन्म दे दिया है…

क्या कोई आम आवाम रहता, तो उसको इस तरीके का प्रशासनिक सपोर्ट मिल पाता  ?….

क्या अवैध निर्माण की जानकारी मिलने के बादल आम लोगों को अधिकारियों की ओर से ये रियायत मिल पाती  ?..

यह घटना इस बात का प्रमाण देती है कि पटना के राजीव नगर इलाके में कैसे बिहार राज्य आवास बोर्ड के अधिगृहीत भूखंड पर भूमाफियाओं एवं सरकारी तंत्र के साथ मिलकर कब्जा किया गया है …

और कई सुलगते सवाल हैं, जिसका जबाव स्कूल प्रबंधन और सरकार को देनी चाहिए ?…

 

 

 

 

 

 

 

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