देश में आगामी जनगणना के साथ जातीय गणना को विधिवत रूप से शामिल करने के केंद्र सरकार के ऐतिहासिक निर्णय का जनता दल (यूनाइटेड) पुरजोर स्वागत करता है। यह निर्णय न केवल सामाजिक न्याय की दिशा में एक दूरदर्शी और क्रांतिकारी कदम है, बल्कि यह उस दृढ़ नेतृत्व और स्पष्ट सोच की भी पुष्टि करता है, जिसकी नींव बिहार के यशस्वी मुख्यमंत्री एवं जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नीतीश कुमार जी ने वर्षों पहले रखी थी।
प्रदेश महासचिव रंजीत कुमार झा ने इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं गृह मंत्री अमित शाह को जदयू परिवार की ओर से कोटिशः आभार व्यक्त किया है और कहा है कि—
“जातीय जनगणना के संदर्भ में नीतीश कुमार का योगदान ऐतिहासिक रहा है। उन्होंने ‘न्याय के साथ विकास’ की अपनी नीति के अनुरूप सबसे पहले बिहार में पारदर्शी जातीय सह आर्थिक गणना कराई और उसके परिणाम सार्वजनिक करते हुए उसे नीति निर्धारण का आधार बनाया। आज देश उसी राह पर चल पड़ा है – यह उनके विजन की जीत है।”
जातिगत आंकड़े देश के सामाजिक-सांख्यिकीय परिदृश्य की सटीक समझ प्रदान करेंगे और नीति-निर्माण को अधिक प्रभावी एवं लक्षित बनाएंगे। यह फैसला वंचित, उपेक्षित एवं सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए नई उम्मीदों का मार्ग प्रशस्त करेगा।
यह उल्लेखनीय है कि:
• वर्ष 2010 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा लोकसभा में आश्वासन देने के बावजूद जातीय जनगणना नहीं कराई गई।
• 2011 में किया गया SECC सर्वेक्षण आंकड़ों की विसंगतियों और राजनीति की भेंट चढ़ गया।
• इसके उलट, बिहार सरकार ने नीतीश कुमार के नेतृत्व में यह कार्य न केवल पूरा किया, बल्कि जनहित में उसका उपयोग भी सुनिश्चित किया।
प्रदेश महासचिव रंजीत कुमार झा ने कहा कि—
“देश के करोड़ों लोगों की आकांक्षा को पहचान दिलाने की जो पहल बिहार से शुरू हुई, आज वह राष्ट्रीय रूप ले चुकी है। यह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की दूरदर्शिता और सामाजिक सरोकारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का परिणाम है।”
जनता दल (यूनाइटेड) विश्वास करता है कि यह निर्णय समाज में समावेशी विकास, समान अवसर, और सशक्तिकरण की प्रक्रिया को और अधिक मजबूत करेगा।
