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झूठ का पुलिंदा है राज्य सरकार द्वारा जारी रिपोर्ट कार्ड : चित्तरंजन गगन

पटना 3 मई 2025 ; राजद के प्रदेश प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने राज्य सरकार द्वारा जारी 20 साल के रिपोर्ट कार्ड को झूठ का पुलिंदा बताते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री जी द्वारा कल लोकार्पण किए गए’बिहार का नवनिर्माण: 20 साल विकास के, बदलते बिहार के ‘ में दर्शाए गए आंकड़े और किए गए दावे केवल कागजी, दिखावटी और बनावटी है।

इसमें जहां एनडीए शासनकाल की उपलब्धियों को काफी बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है वहीं राजद शासनकाल के बारे की उपलब्धियों की चर्चा नहीं की गई है या गलत जानकारी दी गई है। इस रिपोर्ट कार्ड में समय समय पर जारी किए गए एनसीआरबी, नीति आयोग और सीएजी द्वारा जारी रिपोर्टों को सीधे तौर पर नजरअंदाज कर दिया गया है।

शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कानून व्यवस्था, महिला सशक्तिकरण , किसानों की स्थिति सहित सभी क्षेत्रों में सरकार की उपलब्धि नकारात्मक रही है। सबसे हास्यास्पद बात तो यह है रिपोर्ट में महागठबंधन सरकार ( 2015 – 2017 एवं अगस्त 2022- फरवरी 2024) की उपलब्धियों को भी एनडीए सरकार की उपलब्धि बता दी गई है।

श्री गगन ने कहा है कि जारी रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख होना चाहिए था कि राजद शासनकाल में और एनडीए शासनकाल में केन्द्र सरकार से कब और कितनी आर्थिक सहयोग मिला।
राजद प्रवक्ता ने कहा कि राजद शासनकाल में हीं जेपी विश्वविद्यालय छपरा, वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय आरा, बीएन मंडल विश्वविद्यालय मधेपुरा, मौलाना मजहरुल हक विश्वविद्यालय पटना, सिधु-कानु विश्वविद्यालय दुमका, विनोबा भावे विश्वविद्यालय हजारीबाग खुला था। राजद शासनकाल में 20,340 प्राथमिक विद्यालय खोले गए ,19604 प्राथमिक विद्यालय को उत्क्रमित कर अतिरिक्त कमरों का निर्माण एवं उपस्कर दिए गए ; 6,88,157 नियमित शिक्षकों जिनकी नियुक्ति रिक्तियों के विरुद्ध नियमित रूप से होती थी। जबकि नवसृजित एवं उत्क्रमित विद्यालयों के लिये अतिरिक्त 1,96,000 शिक्षा मित्रों की बहाली हुई जो बाद में नियोजित शिक्षक कहलाए। नवसृजित 20,340 प्राथमिक विद्यालयों में 12,619 के भवन बनवाए गए।

एनडीए सरकार बनने के बाद शिक्षकों की नियमित बहाली रोक दी गई। शिक्षक के अवकाश ग्रहण करने के साथ हीं उसके पद को मृत मान लिया गया। अभी भी तीन लाख से ज्यादा शिक्षकों के पद रिक्त हैं। राजद शासनकाल में खोले गए प्राथमिक विद्यालयों को बंद किया जा रहा है या उन्हें निकट के दूसरे विद्यालयों के साथ टैग किया जा रहा है।

आज भी हजारों विधालय भवनहीन हैं। 8004 विधालयों में छात्र -शिक्षक अनुपात 100 से ज्यादा है। 3,276 विधालयों में मात्र एक शिक्षक है। 12,507 विधालयों में मात्र दो शिक्षक हैं। जिन मध्य विद्यालयों को उत्क्रमित कर उच्च माध्यमिक विद्यालय बनाया गया है वहां न भवन हैं, न शिक्षक हैं और न उपस्कर है। विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में किसी -किसी विषय में एक भी शिक्षक नहीं है।न तो विश्वविद्यालयों का सत्र नियमित है।

राजद प्रवक्ता ने कहा कि जिन मेडिकल कॉलेजों को खोलने की चर्चा की गई है उसमें से अधिकांश महागठबंधन सरकार ( 2015 – 2017 ) की है। इन्जिनियरिंग कौलेज, पोलिटेकनिक कौलेज और आईटीआई की घोषणा कर बोर्ड टांग दिया गया है, वहां न सही से भवन है, न शिक्षक हैं और न उपस्कर और प्रशिक्षण सम्बंधी कोई व्यवस्था है।

राजद प्रवक्ता ने कहा कि एनडीए सरकार की सारी उपलब्धियां सचिवालय के फाईलों में सिमट कर रह गया है। जमीनी हकीकत में एनडीए सरकार बिहार के इतिहास में सबसे फिसड्डी साबित हुई है।

चित्तरंजन गगन
प्रदेश प्रवक्ता राजद बिहार

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