बिहार सरकार ने शिक्षकों के लिए ट्रांसफर के रास्ता साफ कर दिया है। सरकार की नई पॉलिसी को मंजूरी दे दी है। इस पॉलिसी के तहत अब BPSC, पुराने शिक्षक और सक्षमता पास शिक्षकों को अब अपने जिले में रहने का मौका मिलेगा।
इस दौरान, गंभीर रोग, मानसिक समस्या से ग्रसित शिक्षकों को तरजीह दी जाएगी। सिंगल महिला, विडो को भी प्राथमिकता दी जाएगी।
अक्टूबर से इसका ऑनलाइन एप्लिकेशन लिया जाएगा। इसके लिए उन्हें 10 ऑप्शन दिए जाएंगे। दिसंबर में उनकी जॉइनिंग कराई जाएगी। सरकार के इस कदम से करीब 5 लाख शिक्षकों को फायदा मिलेगा। इनमें 1 से 8वीं क्लास तक के 4 लाख, वहीं 9 से 12वीं तक शिक्षक शामिल हैं
BPSC शिक्षक कई दिनों से ट्रांसफर पॉलिसी की मांग कर रहे थे। बिहार सरकार ने शिक्षकों के ट्रांसफर को लेकर आवेदन मांगे थे। 2022 में आवेदन लिया गया था। ग्रेड-पे शिक्षकों ने आवेदन भी दिया, लेकिन तबादला नहीं हो सका। तब ट्रांसफर-पोस्टिंग का मामला अटका हुआ था।
ऐसे में शिक्षा मंत्री सुनील कुमार के इस ऐलान को शिक्षकों के लिए नीतीश सरकार की ओर से दुर्गा पूजा और दीपावली के गिफ्ट की तौर पर देखा जा रहा है।
शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने कहा कि अगर इस पॉलिसी में कुछ कमी रह जाती है तो कमिश्नर लेवल पर कमेटी गठित कर उस कमी को पूरा किया जाएगा। इस पर व्यापक पैमाने पर विचार-विमर्श किया गया है। नियोजित शिक्षकों को जॉइनिंग लेटर दी जाएगी। वह सरकारी सेवक होंगे।
वहीं अनुकंपा पर 6 हजार 421 आश्रितों की बहाली होगी। कैबिनेट ने इस पर मुहर लगा दी है। काफी दिनों से यह मामला लंबित था। सुनील कुमार ने बताया कि 2001 में महिलाओं की साक्षरता दर 34% थी, वहीं आज 74% महिलाएं साक्षर हैं।
गेस्ट टीचर के लिए फिलहाल कोई पॉलिसी नहीं है। राज्य में 1 करोड़ 82 लाख स्टूडेंट्स हैं। उन्हें पढ़ाने के लिए पांच लाख से अधिक शिक्षक हैं। TRE 3 की रिजल्ट में रोस्टर क्लियर नहीं है। कुछ जिलों में त्रुटियां हैं। उसे ठीक किया जा रहा है।
शिक्षा विभाग के नए ACS डॉ. एस सिद्धार्थ ने ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर 12 जुलाई 2024 को कमेटी का गठन किया था। शिक्षा विभाग के सचिव बैद्यनाथ यादव को कमिटी का अध्यक्ष बनाया गया था।
वहीं प्राथमिक और माध्यमिक निदेशक को कमेटी में सदस्य के रूप में नामित किया गया था। कमेटी को 15 दिन के अंदर सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपनी थी।
