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EX- MLC दिलीप चौधरी की सरकार से बड़ी मांग !…दस्तावेजों की जांच शीघ्र पूरी कर लंबित वेतन जारी करे सरकार, वेतन नहीं मिलने से शिक्षा व्यवस्था प्रभावित ..

दरभंगा : पूर्व विधान पार्षद एवं शिक्षाविद् डॉ. दिलीप कुमार चौधरी ने गैर-सरकारी मान्यता प्राप्त अनुदानित संस्कृत एवं मदरसा विद्यालयों के शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों का दस्तावेजों की जांच के नाम पर वेतन रोके जाने पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि दस्तावेजों की जांच के नाम पर संस्कृत एवं मदरसा विद्यालयों के शिक्षकों का वेतन रोकना अनुचित है। यह प्रशासनिक लापरवाही है, जिससे शिक्षकों को भारी आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सरकार को बिना किसी देरी के उनका रुका हुआ वेतन जारी करना चाहिए।

डॉ. चौधरी ने कहा कि वेतन न मिलने से शिक्षक अपने परिवार का भरण-पोषण करने में असमर्थ हो रहे हैं। बार-बार जांच के नाम पर अनावश्यक रूप से परेशान किए जाने से विद्यालयों में पठन-पाठन का कार्य भी प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारियों को समय पर दस्तावेजों की जांच पूरी करनी चाहिए तथा जांच प्रक्रिया के कारण शिक्षकों को वेतन के लिए महीनों तक प्रतीक्षा कराना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि समय पर वेतन नहीं मिलने के कारण आज संस्कृत एवं मदरसा विद्यालयों के शिक्षक धरना देने को मजबूर हो गए हैं। नियमित वेतन के अभाव में शिक्षकों के सामने परिवार के भरण-पोषण, बच्चों की पढ़ाई, इलाज, बैंक ऋण की किस्तों के भुगतान तथा दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो गई हैं। लंबे समय तक वेतन लंबित रहने से शिक्षकों का मनोबल भी प्रभावित हो रहा है, जिसका प्रतिकूल प्रभाव शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा है।

डॉ. चौधरी ने राज्य सरकार से इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल समाधान निकालने की अपील की। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री Samrat Choudhary जी से आग्रह किया कि संबंधित विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर गैर-सरकारी मान्यता प्राप्त अनुदानित मदरसा एवं संस्कृत विद्यालयों के शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के पिछले छह माह से लंबित वेतन का अविलंब भुगतान सुनिश्चित कराया जाए।

उन्होंने सरकार से निम्नलिखित मांगों पर भी शीघ्र कार्रवाई करने का आग्रह किया—

* गैर-सरकारी मान्यता प्राप्त अनुदानित संस्कृत एवं मदरसा विद्यालयों के शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के छह माह से लंबित वेतन का तत्काल भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
* भविष्य में प्रत्येक माह समय पर वेतन भुगतान की स्थायी व्यवस्था लागू की जाए।
* संस्कृत विद्यालयों से जुड़ी प्रशासनिक एवं वित्तीय समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाए।
* 1 अप्रैल, 2013 से लंबित वेतन वृद्धि का भुगतान किया जाए।
* एल.पी.ए. संख्या 43/2016 के न्यायादेश के आलोक में 1 मार्च, 1989 से पंचम वेतनमान तथा 1 अप्रैल, 2007 से षष्ठम वेतनमान के अंतर का भुगतान किया जाए।
* शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के लिए “समान कार्य के लिए समान सुविधा” के सिद्धांत को प्रभावी रूप से लागू किया जाए।

डॉ. चौधरी ने कहा कि शिक्षक समाज के भविष्य का निर्माण करते हैं। उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान केवल शिक्षकों के हित में ही नहीं, बल्कि बिहार की शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में भी एक आवश्यक कदम है। सरकार को इस विषय पर संवेदनशीलता एवं तत्परता के साथ निर्णय लेते हुए शिक्षकों के न्यायोचित अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।

 

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