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संजय झा से हुई बहस के बाद मंत्री अशोक चौधरी के करीबी व जेडीयू के पूर्व महासचिव छोटू सिंह निष्कासित, अनुशासनहीनता के आरोप में 6 साल के लिए निष्कासित…

पटना। बिहार की राजनीति में शुक्रवार का दिन काफी गहमागहमी भरा रहा। एक तरफ मुख्यमंत्री आवास (लोक सेवक आवास) में राज्य सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं की समीक्षा को लेकर एक उच्च स्तरीय बैठक हुई तो दूसरी तरफ जदयू ने अनुशासनहीनता के आरोप में अपने पूर्व महासचिव छोटू सिंह को पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया है।

बता दें कि जेडीयू के प्रदेश कमिटी में संगठनात्मक बदलाव को लेकर कई नेताओं में नाराजगी है.. इसी को लेकर जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा से अरबिंद सिंह उर्फ छोटू सिंह की बहस हो गई थी, जिसके चंद घंटों बाद जेडीयू ने छोटू सिंह को निष्कासित कर दिया है…

लोक सेवक आवास में आयोजित बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी एक साथ नजर आए। बैठक का मुख्य केंद्र राज्य में चल रही सरकारी योजनाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग सुनिश्चित करना था।

सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के अब तक के कामकाज की सराहना की, जो गठबंधन सरकार के भीतर समन्वय को दर्शाता है। नीतीश कुमार ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी जिला अध्यक्षों को सरकारी कल्याणकारी योजनाओं की जमीनी स्तर पर निगरानी करनी चाहिए ताकि आम जनता तक उनका लाभ सही ढंग से पहुंच सके।

अनुशासनहीनता पर सख्त जदयू, छोटू सिंह निष्कासित

समीक्षा बैठक के कुछ ही समय बाद, जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने एक कड़ा कदम उठाते हुए पूर्व महासचिव छोटू सिंह को छह साल के लिए पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने इस निष्कासन की घोषणा की।
बताया जा रहा है कि छोटू सिंह हाल ही में गठित पार्टी कमेटी में जगह न मिलने से खासे नाराज थे। अपनी नाराजगी जाहिर करने के लिए वे आज अपने समर्थकों के साथ पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात करने पहुंचे थे। जब उनकी मुलाकात पूर्व मुख्यमंत्री से नहीं हो सकी, तो उन्होंने मौके पर मौजूद कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के सामने ही हंगामा शुरू कर दिया। अनुचित व्यवहार और पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण जदयू ने तुरंत प्रभाव से यह अनुशासनात्मक कार्रवाई की है।

यह घटनाक्रम स्पष्ट करता है कि जदयू संगठन में किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। पार्टी नेतृत्व का संदेश साफ है कि पदों का बंटवारा शीर्ष नेतृत्व का विशेषाधिकार है और इसे लेकर सार्वजनिक प्रदर्शन या विरोध पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला माना जाएगा। फिलहाल पार्टी ने निष्कासन के जरिए संगठन में अपनी पकड़ और अनुशासन की नीति को फिर से दोहराया है।

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