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वर्चस्व की लड़ाई में मारा गया अपराधी सत्तो यादव

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मौसम बदलते ही कोशी इलाका बारूदी धुंआ से हुआ गर्म

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सहरसा दरभंगा सीमा पर अपराधियो ने राजनपुर के पूर्व मुखिया एवं कोसी का आतंक सत्तो यादव को गोली से छलनी कर मौत के घाट उतार दिया। वैसे यह घटना दरभंगा जिले के कुशेश्वर स्थान थाना क्षेत्र का है।लेकिन घटनास्थल सहरसा और दरभंगा जिला के सीमा महिषि थाना इलाके के दुधौली भित्ता बथान गांव की है।

जेल में बन्द कोसी दियारा का कुख्यात काजल यादव के पिता पूर्व मुखिया सत्तो यादव की अज्ञात अपराधियों ने अहले सुबह गोली मारी जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। प्राप्त जानकारी अनुसार सहरसा – दरभंगा जिले के सीमा क्षेत्र दरभंगा जिले के कुशेश्वरस्थान के तिलकेश्वर ओपी क्षेत्र में अज्ञात अपराधियों ने ट्रैक्टर से खेत जोतने के दौरान घटना को दिया अंजाम।

मृतक राजनपुर पंचायत के पूर्व मुखिया थे। मृतक सतो यादव महिषी थाना क्षेत्र के राजनपुर पंचायत के धनौज धर्मपुर गांव के रहने वाले थे। प्राप्त सुचना अनुसार फायरिंग के दौरान सत्तो यादव को कई गोलियां लगी, इसके तुरंत बाद घटनास्थल पर ही सत्तो यादव की मौत हो गई।

मृतक पूर्व मुखिया सत्तो यादव का अपना आपराधिक इतिहास रहा है। मालूम हो कि मृतक पर हत्या, लूट, अपहरण जैसे कई मामले दर्ज हैं। जिस कारण वह पुलिस के डर से भागा फिरता था। बताते चलें कि डेंगराही तिहरे हत्याकांड में भी पुलिस को सत्तो की तलाश थी। कोशी दियारा क्षेत्र में उनका भी वर्चस्व की लड़ाई में कभी हाथ रहा करता था।

उम्र के पड़ाव पर आने के बाद उनका पुत्र काजल यादव ने कमान संभाल लिया था। इसने अपने बाहुबल के बदौलत मुखिया के पद को भी सुशोभित किया था। इलाके में इसका अदावत हमेशा दियारा क्षेत्र के अपराधियों से चलता रहता था। कभी कुख्यात रामानंद यादव तो कभी पारो यादव से और इसकी हत्या उसी का परिणाम के रूप में देखा जा सकता है।

इस घटना के बाद से खूनी संघर्ष की आशंका प्रबल होती दिखाई दे रही है। मृतक के शव को पुलिस ने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए दरभंगा भेज दिया है। पुलिस घटनास्थल पर पहुंचकर तफ्तीश में जुट चुकी है। आगे देखना दिलचस्प होगा कि पुलिस कब तक हत्या के सही कारणों का खुलासा कर पाती है। मालूम कि 10 नवम्बर को सहरसा जिले के सलखुआ थाना के चिड़ैया ओ पी में अपराधियों ने घर मे घुस कर धुल्लो चौधरी एवं राजेन्द्र रॉय को गोली मार कर अपराधियो ने हत्या कर दिया था। सूत्रों के अनुसार कोशी इलाके में वर्षो से बर्चस्व के खातिर प्रायः कोशी की पानी लहूलुहान होती रही है ।

इस इलाके में अपराधियों का वर्चस्व इतना रहा है कि सत्यपाल सिंह डी एस पी को पचहत्तर दियरा में मुठभेड़ में शहीद होना पड़ा । सलखुआ थाना क्षेत्र में ही कुछ वर्ष पूर्व सैफ जवान को भी मुठभेड़ में शहीद कर दिया गया था । क्या पुलिस पदाधिकारी कोशी दियरा में अपनी नोकरी को बचाने के लिये अपराधियो को खुली छूट दे रखी है।

बीएन सिंह पप्पन , सहरसा

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