2 अप्रैल को रामनवमी है। मर्यादा पुरुषोत्तम राम के जन्मदिन के अवसर पर पूरे देश में चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी को उत्सव मनाया जाता है। इससे नौ दिन पहले यानि 25 मार्च को चैत्र नवरात्र की शुरुआत हो रही है। इन दोनों पर्वों की तैयारी काफी पहले से शुरू हो जाती है।
इस बार भी तैयारी चल रही थी, हालांकि विदेशों में फैल रहे ‘कोरोना’ के दहशत से आयोजक अनजान नहीं थे। लेकिन, ‘कोरोना’ का खतरा इतनी तेजी से इनकी ओर बढ़ रहा है, इस बात से अधिकांश लोग बेखबर थे। अब, जबकि यह खतरा सिर पर आ चुका है, ऐसे में अधिकांश मेले के आयोजक मंडल स्तब्ध हैं।
चैत्र नवरात्र में शारदीय नवरात्र की तरह ही पूरे विधि-विधान के साथ मां दुर्गा की आराधना की जाती है। इस अवसर पर आयोजन स्थल पर काफी भीड़ होती है। मेले का आयोजन होता है। 10 दिन के अन्दर लाखों लोग पूजा पंडालों का भ्रमण करते हैं। विशेष रूप से अष्टमी, नवमी और दशमी को पूजा पंडालों में अनियंत्रित भीड़ होती है।
इस भीड़ में महिला और पुरुषों के साथ बच्चों की भी अच्छी-खासी संख्या होती है। अन्य साल नवरात्र के तीन दिनों की भीड़ को संभालना पूजा आयोजकों के लिए सिरदर्दी भरा काम होता है। जबकि, इस बार ‘कोरोना’ के साये में हो रही पूजा के आयोजकों की सिरदर्दी और अधिक बढ़ चुकी है।
दरअसल, पूजा श्रद्धा का विषय है, जहां कोई तर्क नहीं काम करता है। और विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों में जहां शिक्षित और बौद्धिक रूप से जागरूक लोगों की संख्या कम होती है, पूजा के दौरान भीड़ को रोक पाना प्रायः असंभव होता है। विशेष रूप से महिलाओँ की भीड़ को, जो दिन में पूजा और आरती के वक्त एवं शाम में दीपदान के वक्त झुंड बनाकर पूजा पंडालों में पहुंचती हैं। अन्य बार पूजा पंडालों में भीड़ को नियंत्रित करना ही एक बड़ी चुनौती होती है, लेकिन इस बार भीड़ को ‘कोरोना’ के संक्रमण से बचा पाने की बड़ी चुनौती है।
खासकर एक सप्ताह के अन्दर बिहार के बाहर से आने वाले लोगों की संख्या को देखते हुए यह चुनौती और भी बड़ी दिखने लगी है। दानापुर में कार्यरत दैनिक जागरण के पत्रकार चन्द्रशेखर भगत ने बताया कि सिर्फ दानापुर स्टेशन पर 22 मार्च को 5 हजार से अधिक लोग लम्बी दूरी की ट्रेनों से उतरे हैं। जबकि 23 मार्च को भी कम-से-कम इतने ही लोगों के बिहार के बाहर से आने की संभावना है। इन लम्बी दूरी की ट्रेनों में अगर कोई ‘कोरोना’ संक्रमित रहा होगा, तो सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि उसने न जाने कितने लोगों संक्रमित कर दिया होगा।
यहां इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि बाहर से आने वाले व्यक्ति पूजा पंडालों में संक्रमण की आशंका को कई गुणा बढ़ा देंगे।
इस विषम परिस्थिति में कई जगहों पर पूजा आयोजकों ने खुद से निर्णय लेते हुए इस बार मेले का आयोजन नहीं करने का फैसला लिया है।
मिथिलांचल के एक प्रसिद्ध गांव ‘नवानी’ में बासंती नवदुर्गा मंदिर में आयोजकों ने सभी सांस्कृतिक कार्यक्रमों और मेले के आयोजन को रद्द कर दिया है। हालांकि पूजा और पाठ पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों के मुताबिक होंगे। विषम परिस्थिति को देखते हुए सभी पूजा स्थलों के आयोजन समिति को ‘नवानी’ गांव की तरह ही अपने यहां भी पूजा के दौरान विभिन्न तरह के कार्यक्रमों को रद्द कर देना चाहिए।
उधर, भारत सरकार ने बिहार की राजधानी पटना सहित देश के कई शहरों को लॉकडाउन कर दिया है। वहीं बिहार सरकार ने कोरोना की खतरा को देखते हुए पूरे राज्य में लॉकडाउन की घोषणा कर दी है। ऐसी स्थिति में स्थानीय प्रशासन अपने-अपने क्षेत्र में पूजा पंडालों में जुटने वाली भीड़ को प्रतिबंधित करने के लिए कोई ठोस कदम उठा सकता है। हमारा दायित्व है कि विश्वव्यापी महामारी से निपटने में हम भी अपना सहयोग दें।
अवनींद्र झा, बिहार नाउ
