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जननायक कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देने का निर्णय मोदी का करोड़ों पिछड़ों,अति पिछड़ों का सम्मान – सम्राट चौधरी…

‘सबका साथ, सबका विकास’ के अभियान से कर्पूरी के सपनों को साकार कर रहे हैं मोदी

* पिछड़ा वर्ग से आने वाले मोदी ने पिछड़ों का समझा है दर्द,

पटना‌ : भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने कहा है कि पिछड़ों के मसीहा जननायक कर्पूरी ठाकुर को उनकी जन्मशताब्दी पर *भारत रत्न* देने का निर्णय कर देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार व देश के करोड़ों पिछड़ों का सम्मान किया है।

उन्होंने मरणोपरांत जननायक को भारत रत्न से सम्मानित करने की केंद्र सरकार के निर्णय पर प्रधानमंत्री का आभार जताते हुए कहा है कि ‘सबका साथ, सबका विकास’ के अभियान से वे कर्पूरी ठाकुर के ही सपनों को साकार कर रहे हैं। कर्पूरी जी का सपना था कि देश की सत्ता पर कोई पिछड़ा का बेटा बैठे। प्रधानमंत्री की कुर्सी सम्भाल कर मोदी ने कर्पूरी जी के सपने को सच किया है।

सम्राट चौधरी ने कहा है कि पिछड़ा वर्ग से आने वाले मोदी ने पिछड़ों का दर्द समझा है। केंद्र सरकार की तमाम कल्याणकारी योजनाओं के केंद्र में समाज का पिछड़ा समाज ही है।

कर्पूरी ठाकुर की सौंवी जयंती पर उन्हें भारत रत्न से सम्मानित करना सभी पिछड़ों का सम्मान है। ठाकुर भारत के स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षक, राजनीतिज्ञ तथा बिहार राज्य के दूसरे उपमुख्यमंत्री और दो बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं।

उन्होंने कहा कि लोकप्रियता के कारण ही उन्हें जन-नायक कहा जाता था।कर्पूरी ठाकुर का जन्म भारत में ब्रिटिश शासन काल के दौरान समस्तीपुर के एक गांव पितौंझिया, जिसे अब कर्पूरीग्राम कहा जाता है, में नाई जाति में हुआ था।जननायक जी के पिताजी का नाम श्री गोकुल ठाकुर तथा माता जी का नाम श्रीमती रामदुलारी देवी था। इनके पिता गांव के सीमांत किसान थे तथा अपने पारंपरिक पेशा नाई का काम करते थे।भारत छोड़ो आन्दोलन के समय उन्होंने 26 महीने जेल में बिताए थे। वह 22 दिसंबर 1970 से 2 जून 1971 तथा 24 जून 1977 से 21 अप्रैल 1979 के दौरान दो बार बिहार के मुख्यमंत्री पद पर रहे।

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