बिहार के 1 लाख 14 हजार नियोजित शिक्षकों को बुधवार को राज्यकर्मी का दर्जा मिल गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना के अधिवेशन भवन में नियोजित शिक्षकों को जॉइनिंग लेटर सौंपा।
इस दौरान उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, ‘नियोजित शिक्षक जिस जगह पर काम कर रहें हैं। वहीं काम करेंगे। नई जगह पोस्टिंग नहीं दी जाएगी।’
इस बयान के बाद कार्यक्रम में शिक्षक तालियां बजाने लगीं। सीएम नीतीश के इस फैसले का असर बिहार के साढ़े तीन लाख नियोजित शिक्षकों पर पड़ेगा।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा, ‘2005 में स्कूल की कमी थी। शिक्षक भी कम थे। बच्चों के लिए स्कूल भवन नहीं थे। 2008 में लड़कियों को साइकिल दी गई। 2010 में लड़कों को भी हमने साइकिल दी।’
‘2006-07 में नियोजित शिक्षक की बहाली की गई। नगर निकाय और पंचायत में नियुक्ति शुरू हुई। हमने 3 लाख 67 हजार नियुक्ति की। साल में 2023 में BPSC से नियुक्ति शुरू हुई। 2 लाख 17 हजार 73 शिक्षक नियुक्त हुए। 28 हजार नियोजित शिक्षक से BPSC शिक्षक बने।’
इसके बाद उन्होंने फिर दोहराया, ‘2 बार गलती कर दी थी।
सीएम ने कहा कि ‘हम नवंबर 2005 में आए थे। उस वक्त शाम में कोई घर से नहीं निकलता था। लोग पैदल चलते थे। रोड नहीं थी। स्कूल नहीं था।
मेरे गांव में स्कूल था। आजादी के लिए मेरे बाबूजी लड़े थे। इसके बाद वहां स्कूल बना था। आज जो काम दिख रहा है वो हमारी सरकार ने करवाया है। पहले कुछ काम नहीं हुआ।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने कहा कि ‘शिक्षा विभाग में महत्वपूर्ण बदलाव आया है। 2024 में 63 हजार करोड़ का बजट है। बिहार में 5 लाख 77 हजार टीचर हैं।
महिला साक्षरता 77% है। शिक्षकों से मेरा अनुरोध है कि आप अनुशासन में रहें। आपके हाथ में बिहार का भविष्य है। आप बच्चों को अच्छा नागरिक बनाएं। शिक्षा विभाग आने वाले दिनों में एकेडमिक एक्सलेंस की ओर जाएगा।’
