पैनल में शामिल 50 लोगों ने महिला उद्यमियों के लिए चुनौतियां और सफलता की कहानी घटने के लिए डिजिटल टूल्स के उपयोग के रास्तों पर चर्चा की…
उद्यमशीलता की स्थिति एक राज्य या शहर में महिलाओं की स्थिति से गहराई से जुड़ी होती है और महिला उद्यमियों के लिए एक समावेशी पारितंत्र का निर्माण करना महत्वपूर्ण है।। यह उद्गार sheatwork.com Aatmanirbhar She Entrepreneurship Dialogues के उद्घाटन सत्र में वक्ताओं ने व्यक्त की।।
इस ऑनलाइन सत्र में मुख्य जोर बिहार में महिला उद्यमियों की संभावनाओं का विस्तार कर रहा था और यह महिला उद्यमियों के लिए वन स्टॉप नॉलेज हब द्वारा भारत के विभिन्न राज्यों में महिला उद्यमियों की स्थिति उजागर करने के उद्देश्य से शुरू की गई वेबीनार की सीरीज में पहला आयोजन है।।
। प्रमुख वक्ताओं में बिहार महिला उद्योग संघ के अध्यक्ष और पेटल स्टाफ के संस्थापक उषा झा आंध्र यूनिवर्सिटी स्कूल के संस्थापक और सीईओ संजीव इमेज रेडिएटर की संस्थापक एवं सीईओ हिमानी मिश्रा फ्रंटलाइन बिजनेस सॉल्यूशंस की वाइस चेयरपर्सन और भाजपा पूर्वांचल मोर्चा के उपाध्यक्ष सोनिया संजय सिन्हा और sheatwork.com की संस्थापक भी शामिल रहे।।।।
यह पैनल इस बात पर एकमत था कि कोविड-19 को देखते हुए अधिक संख्या में कारोबारियों ने डिजिटल टूल्स को आत्मसात किया है और महिलाओं को यह समझने एवं स्वीकार करने की जरूरत है कि इस तरह के डिजिटल बाजार उनके उद्यमों को सहयोग कर सकते हैं।।पैनल में शामिल वक्ताओं के मुताबिक महिलाओं को उत्पादों की लिस्ट इन सोशल मीडिया में उपस्थिति जीएसटी की आवश्यकता एग्री ग्रेट शादी से जागरूक किए जाने की जरूरत है जिससे वे सफल महिला कारोबारी बन सके।।। पैनल का विचार है कि बिहार में उद्यमशीलता की कुल स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है और सरकार नीतियों का लाभ लेने में सबसे बड़ी समस्या यह है कि जमीनी स्तर पर महिलाएं इन नीतियों से वाकिफ नहीं है इस सोच को कारोबार के अनुरूप सोच में बदलना आज के समय की जरूरत है और वैश्विक बनने के लिए स्थानीय संसाधनों को अपनाना सफलता का मंत्र हो सकता है।।।
: इस वेबिनार को संबोधित करते हुए sheatwork.com की संस्थापक रूबी सिन्हा ने कहा कि हम में से ज्यादातर लोग केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा महिला उद्यमियों के लिए लागू की गई नियुक्तियों प्रोत्साहन के बारे में वाकिफ नहीं है।।
वास्तव में उद्योग की रिपोर्टों के मुताबिक बिहार में स्थापित ज्यादातर महिला उद्यमी मित्र घोषणा खुद के संसाधनों से किया है केवल 5% महिला उद्यमियों को सरकार से वित्तीय सहायता मिली है जबकि महज 1% ने वित्तीय संसाधनों से लिया है यह स्थिति तब है जब सरकार ने 2017 में ₹500 की बिहार स्टार्टअप नीति घोषित की है और स्टार्टअप डॉट गवर्नमेंट डॉट इन वेबसाइट के जरिए इस पर पूरी तरह से डिजिटलरूप में लाने का प्रयास कर रही है।।इस संस्करण के साथ प्रारंभ हुए बिना उसकी एक सीरीज के जरिए हम विभिन्न भारतीय राज्यों में महिला उद्योग की स्थिति उजागर करने और सूचना की खाई को पाटने का प्रयास कर रहे हैं।।।
बिहार महिला उद्योग संघ के अध्यक्ष व पेटल्स क्राफ्ट के संस्थापक उषा झा ने कहा अनुभव और संचार कौशल की कमी की वजह से बिहार की महिला उद्यमी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को पेश करने में असमर्थ रही हैं।।यहां कुशल महिलाओं की कोई कमी नहीं है लेकिन उनके कौशल का पूर्ण दोहन अभी किया जाना बाकी है जिससे उन्हें सशक्त बनाया जा सके और समाज के एक बड़े तबके को सामाजिक और आर्थिक रूप से विकसित किया जा सके यहां की आधी आबादी महिलाओं की है उद्यमी के तौर पर कारोबार में उनका योगदान अभी उस स्तर पर नहीं पहुंचा है मैं आशा करती हूं कि जैसे प्लेटफार्म से इस व्यवस्था में अंतर पाटने में मदद मिलेगी।।।
बिजनेस सॉल्यूशन की वाइस चेयरमैन और भाजपा पूर्वांचल मोर्चा की उपाध्यक्ष सोनिया संजय सिंह ने कहा इस राज्य में महिला उद्यमियों के सामने मौजूद प्रमुख चुनौतियों में परिवार का दबाव, लालन-पालन, समाज और लिंग भेद व सामाजिक आर्थिक पुरानी सोच है।जैसे ही लोग सुनाते हैं कि आप बिहार से हैं तो आपको रास्ते में दो स्पीड ब्रेकर्स मिलते हैं। आपको यह सिद्ध करना पड़ता है कि आप एक सशक्त और समर्थ महिला उद्यमी हैं, भले ही आप बिहार से हैं। एक मजबूत इरादों वाली महिला समाज की सभी विषम परिस्थितियों से निपट सकती है, बशर्ते उसे सही प्रोत्साहन मिले।
: दि आंत्रप्रिन्योरशिप स्कूल के संस्थापक और सीईओ संजीव शिवेश ने कहा बिहार एक ऐसी भूमि है जहां गणतंत्र का बीज बोया गया। अब समय आ गया है कि हम यहां उद्यमशीलता का बीज बोये । यह एक बड़ा राज्य है जो प्रतिभाशाली लोगों से भरा पड़ा है , लेकिन ज्यादातर आर्थिक संकेतकों में यह अन्य सभी राज्यों से लगातार पिछड़ रहा है । व्यापक स्तर पर ऐसे उद्यमी तैयार करके दिशा बदली जा सकती है जो स्थानीय समस्याओं को हल करें। आइए 5 साल में 100000 नए उद्यमों का निर्माण करने का एक विजन तय करें। यह आसान नहीं है ,लेकिन मुश्किल भी नहीं है। इससे निवेश, रोजगार सृजन और जबरदस्त वृद्धि का एक चक्र शुरू करके की ताकत है। समाज के प्रत्येक तबके के चौतरफा लाभ के लिए महिलाओं को इस तरह विजन का तारामंडल बनने दे। युवाओं ,कारोबारी समुदाय, शिक्षाविदों ,निवेशकों को शामिल कर एक व्यापक और समग्र पारितंत्र का निर्माण करना और नौकरशाही से जुड़ी अड़चनों को दूर करने के साथ ही सही प्रोत्साहन देना आगे का रास्ता होना चाहिए।
ब्रांरेडिएटर की संस्थापक और सीईओ श्री्ी हिमानी मिश्रा मिश्रा ने कहा जब एक महिला अपना खुद का उद्यम शुरू करने का पक्का संकल्प लेती है तो उसे वास्तविक कारोबारी समस्याओं से कहीं अधिक प्रतिबद्धता की विश्वसनीयता और सामाजिक ढांचे को लेकर अधिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है राज्य सरकार के लिए एक महिला अनुकूल कारोबारी प्रति तंत्र तैयार करना महत्वपूर्ण है इनमें सख्त पात्रता के मानकों में ढील कारोबारी की सीमा महिला आबादी में उनकी विशेषज्ञता के साथ कौशल का सही आकलन आदि आदि शामिल है महिलाओं के लिए मैं कहना चाहूंगी कि कोविड-19 को देखते हुए अधिक से अधिक कारोबारी डिजिटल रास्ता अपना रहे हैं इसलिए व्यक्ति को भविष्य के लिए तैयार ऐसे सॉल्यूशन की दिशा में काम करना चाहिए जो बदलते समय के साथ खुद को ढाल सके या ना केवल सबसे दुरुस्त कारोबारी है करो अस्तित्व के लिए है बल्कि उनके लिए भी है जो अस्तित्व के लिए बदलता है और उत्कृष्टता हासिल करता है इस सीरीज के अगले संस्कारों का जोर कारोबार शुरू करने विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने और उद्यमशीलता की बारीकियों को समझने पर केंद्रित होगा।
