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आंगनबाड़ी केंद्रों पर गूंजी मंगल गीत, गर्भवती का हुआ गोदभराई…

गर्भवती महिलाओं को दी गयी पोषण की पोटली
• पोषण की आवश्यकता व महत्व के बारे में जानकारी

मधुबनी /7 मार्च। स्वस्थ रहेगी जच्चा तो तंदुरुस्त होगा बच्चा. इस कथन को आत्मसात करने के लिए आईसीडीएस विभाग की ओर से शनिवार को आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 79 ब्लॉक मधवापुर पर गोद भराई दिवस का आयोजन किया गया. मंगल गीतों के साथ गर्भवती महिला को उपहार के रूप में पोषण की पोटली दी गई है। जिसमें गुड़, चना, हरी पत्तेदार सब्जियां, आयरन की गोली, पोषाहार व फल आदि शामिल थे. महिलाओं को उपहार स्वरुप पोषण की थाली भेंट की गयी, जिसमें सतरंगी थाली व अनेक प्रकार के पौष्टिक भोज्य पदार्थ शामिल थे। गर्भवती महिलाओं को चुनरी ओढ़ाकर और टीका लगाकर महिलाओं की गोद भराई की रस्म पूरी की गई। सभी महिलाओं को अच्छे सेहत के लिए पोषण की आवश्यकता व महत्व के बारे में जानकारी दी गई।

गर्भस्थ शिशु की बेहतर स्वास्थ्य पर हुई चर्चा:
गोद भराई रस्म में पोषक क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं अन्य महिलाओं ने भाग लिया। सेविकाओं द्वारा गर्भवती महिलाओं के सम्मान में उसे चुनरी ओढ़ा उसे तिलक लगा और गर्भस्थ शिशु की बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गोद में पोषण संबंधी पुष्टाहार फल सेव, संतरा, बेदाना, दूध,अंडा डाल सेवन करने का तरीका बताया गया। साथ ही गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को आयरन की गोली खाने की सलाह दी। गर्भवती महिला कुछ सावधानी और समय से पुष्टाहार का सेवन करें तो बिना किसी अड़चन के स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकती हैं।

गर्भधारण की पुष्टि होने पर डॉक्टर से करायें चेकअप:
मधवापुर की सीडीपीओ सुधा कुमारी ने कहा जैसे ही महिलाओं को गर्भधारण की पुष्टि हो जाय वे निकटतम स्वास्थ्य केंद्र चिकित्सक के निगरानी में रहें तथा नियमित रूप से चेक-अप कराएं। उन्होंने गर्भवती महिलाओं को गर्भधारण से लेकर बच्चे के जन्म तक बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में बताया। आखिरी महीनों में शरीर को अधिक पोषक तत्वों की जरूरत होती है। इस दौरान आहार में प्रोटीन, विटामिन, कार्बोहाइड्रेट के साथ वसा की भी मात्रा का होना जरूरी होता है। महिलाओं को प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना, जननी सुरक्षा योजना, मातृ शिशु सुरक्षा कार्ड, प्रसव पूर्व देखभाल, एनीमिया की रोकथाम व पौष्टिक आहार के संबंध में जानकारी दी।

ताकि कुपोषित बच्चे न हों पैदा:

आईसीडीएस के डीपीओ रश्मि वर्मा ने बताया इस प्रयास के पीछे उद्देश्य यह है कि जागरूकता की कमी और अभाव में गर्भवती महिलाओं में खून की कमी आ जाती है। प्रेग्नेंसी के दौरान ध्यान न देने पर महिला कमजोर हो जाती हैं। जिसके कारण पैदा होने वाला बच्चा कमजोर होता है, जो कि कुपोषण का शिकार हो जाता है। ऐसी स्थिति न पैदा हो इसके लिए गर्भवती महिला को बेहतर देखभाल की जानाकरी दी गयी तथा पौष्टिक आहार लेने की सलाह दी गयी।
180 गोलियां जरूर लेनी चाहिए:

जिन महिलाओं में खून की कमी हो, उन प्रेग्नेंट महिलाओं को बच्चे को जन्म देने से पहले 180 आयरन की गोलियां लेनी चाहिए और 180 ही जन्म देने के बाद।

छह माह तक सिर्फ स्तनपान करायें:

आंगनबाड़ी सेविका रेखा झा ने बताया गोदभराई के साथ महिलाओं को जानकारी दी गई कि प्रारंभिक अवस्था में उचित पोषण नहीं मिलने से बच्चों का शारीरिक एवं मानसिक विकास अवरुद्ध हो सकता है. इसलिए जब भी मां बन रहीं हो शिशु के नियमित स्तनपान के फायदों बारे में जानकारी जरूर लें। शून्य से 6 माह के बच्चे को सिर्फ स्तनपान और 6 से 8 माह के शिशुओं को स्तनपान के साथ पौष्टिक ऊपरी आहार देना चाहिए। छ्ह माह तक शिशु को केवल स्तनपान कराने से दस्त और निमोनिया के खतरे से बचाया जा सकता है। 9 से 24 माह के बच्चों को स्तनपान के साथ तीन बार अर्ध ठोस पौष्टिक आहार देना चाहिए। बच्चे के शारीरिक व मानसिक विकास के लिए आहार की विविधता का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।

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