बिहार के बेगूसराय से एक ऐसी खौफनाक खबर सामने आई है, जिसने सूबे की कानून व्यवस्था पर एक बार फिर से बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। एक तरफ जहां पूरा देश 2 अक्टूबर को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती मना रहा था, देश में अमन और चैन की बातें हो रही थीं, ठीक उसी शाम बेगूसराय अपराधियों की गोलियों की तड़तड़ाहट से दहल उठा। बेखौफ बदमाशों ने सुशासन के दावों की धज्जियां उड़ाते हुए एक 27 साल के बेकसूर नौजवान को बीच सड़क पर गोलियों से भून डाला।
सरेआम खूनी खेल: तड़प-तड़प कर तोड़ा दम
दिल दहला देने वाली यह वारदात बेगूसराय के फुलवड़िया थाना क्षेत्र के बख्तर स्थान के पास की है। मृतक की पहचान तीन बटिया स्थान निवासी गणेश कुमार के रूप में हुई है, जो गाड़ियों को धोने (वाशिंग सेंटर) का काम करके अपने परिवार का पेट पालता था।
चश्मदीदों के मुताबिक, गणेश कुमार शाम को अपनी मोटरसाइकिल से घर लौट रहा था। इसी दौरान घात लगाए बैठे बाइक सवार दो अपराधियों ने उसे घेर लिया। इससे पहले कि गणेश कुछ समझ पाता, बदमाशों ने उस पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। गणेश को कई गोलियां लगीं और वह खून से लथपथ होकर जमीन पर गिर पड़ा। वारदात को अंजाम देने के बाद हत्यारे हथियार लहराते हुए बड़े आराम से फरार हो गए। आनन-फानन में गणेश को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन घाव इतने गहरे थे कि उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।
पुलिसिया कार्रवाई: वारदात के बाद जागी खाकी !
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। भारी पुलिस बल के साथ अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने घटनास्थल से कारतूस के खोखे बरामद किए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए FSL (फॉरेंसिक) की टीम को बुलाया गया है और वैज्ञानिक पद्धति से जांच की जा रही है। अपराधियों का सुराग लगाने के लिए पुलिस आसपास के इलाकों में लगे CCTV कैमरों की फुटेज को खंगाल रही है। SDPO तेघड़ा के नेतृत्व में पुलिस की कई टीमें आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही हैं।
सरकार और तंत्र पर सुलगते सवाल❓
इस सनसनीखेज हत्याकांड के बाद पूरे इलाके में आक्रोश और दहशत का माहौल है। स्थानीय लोगों ने पुलिस गश्त और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता जताई है। जनता अब सीधे सरकार से पूछ रही है:
• जब त्योहारों और राष्ट्रीय पर्वों पर सुरक्षा के कड़े दावे थे, तो अपराधी हथियार लेकर सड़कों पर कैसे घूम रहे थे❓
• क्या बिहार में अब आम आदमी की जान की कोई कीमत नहीं रह गई है❓
• आखिर कब तक पुलिस सिर्फ
‘जांच जारी है’ और ‘पुरानी रंजिश’ का बहाना बनाकर अपनी नाकामी छुपाती रहेगी❓
फिलहाल, पुलिस के हाथ खाली हैं और यह साफ होना बाकी है कि इस बेकसूर की हत्या के पीछे असली वजह क्या थी। लेकिन इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि बेगूसराय में अपराधियों के मन से कानून का डर पूरी तरह खत्म हो चुका है।
