दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव अब बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। राजनीतिक गलियारों और चुनावी चर्चाओं की मानें तो इस बार बिहार प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता डॉ. मदन मोहन झा का पलड़ा काफी भारी नजर आ रहा है। लंबे समय से शिक्षकों के बीच सक्रिय उपस्थिति और उनकी समस्याओं को उठाने की वजह से शिक्षकों के एक बड़े वर्ग का रुझान उनके पक्ष में दिखता नजर आ रहा है।
शिक्षकों के बीच गहरी पैठ और अनुभव का लाभ
मदन मोहन झा क्षेत्र में एक जाना-पहचाना और अनुभवी चेहरा हैं। स्थानीय शिक्षकों के अनुसार, वेतन विसंगतियों, पुरानी पेंशन योजना, और सेवा शर्तों से जुड़े मुद्दों पर उनकी मुखरता ने उन्हें शिक्षक समुदाय में बढ़त दिलाई है। मतदाताओं का मानना है कि उच्च सदन में शिक्षकों की बात मजबूती से रखने के लिए उनके पास लंबा राजनीतिक और विधायी अनुभव है।
चुनावी समीकरण और जमीनी पकड़
चुनावी विश्लेषकों का कहना है कि दरभंगा, मधुबनी और आसपास के जिलों के शिक्षक मतदाताओं के बीच लगातार चलाए गए जनसंपर्क अभियान ने मदन मोहन झा की स्थिति को काफी मजबूत किया है। विपक्षी प्रत्याशी हालांकि चुनावी लड़ाई को त्रिकोणीय या बहुकोणीय बनाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन मदन मोहन झा की जमीनी पकड़ और व्यक्तिगत संपर्कों ने अन्य उम्मीदवारों की राह को कठिन बना दिया है।
अंतिम मोड़ पर लड़ाई
जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, चुनावी सरगर्मी अपने चरम पर है। शिक्षक संघों और विभिन्न गुटों के समर्थन से यह तय माना जा रहा है कि इस सीट पर मुकाबला बेहद कड़ा है, लेकिन फिलहाल डॉ. मदन मोहन झा चुनावी रेस में अपने प्रतिद्वंदियों से आगे निकलते दिखाई दे रहे हैं।
