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बिहार MLC चुनाव में क्यों उड़ी है दिग्गजों की नींद? जानें 8 सीटों का पूरा गणित…

पटना : बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के बाद अब सबकी नजर बिहार विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की आठ सीटों पर होने वाले चुनाव पर टिकी है. प्रशांत किशोर बांकीपुर सीट जीतने के बाद अब सभी आठ सीटों पर उम्मीदवार उतारने की घोषणा कर चुके हैं. उनके इस बड़े फैसले ने राज्य की पारंपरिक दलीय राजनीति में एक नई हलचल पैदा कर दी है.

सत्ताधारी खेमे में मची अंतर्कलह

प्रशांत किशोर के इस कदम के बाद जदयू के अंदर भारी घमासान मचा हुआ है और महागठबंधन में भी एकजुटता दिखाई नहीं दे रही है. लगातार चुनाव जीत रहे नीरज कुमार, नवल यादव और संजय सिंह जैसे दिग्गज नेताओं की नींद उड़ी हुई है. जदयू में मचे इस घमासान के बाद प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने तत्काल बड़ी बैठक बुला ली है.

अनंत सिंह को मनाने की विशेष जिम्मेदारी

पार्टी के अंदर मचे इस घमासान को शांत करने और डैमेज कंट्रोल करने की कोशिशें तेज कर दी गई हैं. विधायक दल के नेता श्रवण कुमार को अनंत सिंह को मनाने की विशेष जिम्मेदारी दी गई है. पहली बैठक में अनंत सिंह पार्टी कार्यालय आए तो जरूर थे, लेकिन उनके बयानों से साफ जाहिर है कि उनकी नाराजगी अभी तक पूरी तरह दूर नहीं हो सकी है.

“सिर्फ अनंत सिंह को नहीं बुलाया गया था. पटना स्नातक क्षेत्र में जितने भी एमएलए, एमपी हैं, जो हार गए थे उनको भी और एमएलसी को भी बुलाया गया था. इससे पहले पार्टी के जिलाध्यक्षों से बैठक हुई थी. यह दूसरी बैठक आगे की रणनीति पर विचार करने के लिए की गई थी. कुछ विचार हुआ है कुछ होना बाकी है. काम शुरू कर दिया गया है.”-श्रवण कुमार, मंत्री और विधायक दल के नेता. जदयू

“जदयू के अंदर सब कुछ ठीक नहीं है, अब वह खुलकर सामने आ गया है. अनंत सिंह ने पटना स्नातक क्षेत्र के सभी 26 विधानसभा सीटों पर नीरज कुमार के खिलाफ प्रचार करने की बात कह दी है.”- एजाज अहमद, आरजेडी प्रवक्ता

सीमित मतदाताओं का जमीनी गणित

इधर प्रशांत किशोर की टीम का उत्साह चरम पर है, लेकिन मुख्य सवाल यही है कि क्या शिक्षक और स्नातक मतदाता प्रशांत किशोर को सीधे विकल्प के रूप में स्वीकार करेंगे. विशेषज्ञों का मानना है कि इस चुनाव में मतदाता काफी सीमित होते हैं. इसलिए जो जमीन पर वोटर्स को बेहतर ढंग से मैनेज करेगा, राजनीतिक रूप से बाजी अंततः उसी के हाथ लगेगी.

प्रत्याशियों की घोषणा और माहौल

आगामी 16 नवंबर को इन सभी आठ विधान परिषद सदस्यों का कार्यकाल पूरा होने जा रहा है. इसमें से चार स्नातक निर्वाचन क्षेत्र और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की सीटें शामिल हैं. एनडीए की तरफ से अधिकांश सीटों पर उम्मीदवारों के नाम की घोषणा हो चुकी है, लेकिन बागी प्रत्याशियों ने उनकी नींद उड़ाकर पूरे चुनावी माहौल को बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया है.

अंतिम चुनावी बिसात और मंथन

महागठबंधन की ओर से अभी तक किसी भी उम्मीदवार के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, जबकि प्रशांत किशोर ने जल्द ही नाम तय करने की बात कही है. बहरहाल, चुनावी प्रचार में सभी दल कूद पड़े हैं. जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा का कहना है कि वे सभी नेताओं से फीडबैक लेने के बाद ही इस विषय पर कुछ स्पष्ट बोलेंगे.

“जिसको चुनाव लड़ना है लड़े. प्रतिद्वंद्वी के बारे में क्या कहना है. हम लोग पूरी मजबूती से चुनाव लड़ेंगे. पार्टी के प्लेटफॉर्म पर चर्चा के बाद ही इसपर कुछ टिप्पणी की जाएगी.”- उमेश कुशवाहा, प्रदेश अध्यक्ष, जेडीयू

चुनावी सीटों का भौगोलिक विस्तार

बिहार विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव का दायरा काफी बड़ा है. पटना शिक्षक और स्नातक सीट के अंतर्गत पटना, नवादा और नालंदा जिले आते हैं. इसके अलावा, सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का भौगोलिक विस्तार पांच जिलों छपरा, सिवान, गोपालगंज, पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण (बगहा) तक फैला हुआ है.

तिरहुत और दरभंगा का समीकरण

तिरहुत स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में मुख्य रूप से चार बड़े जिले मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर और वैशाली शामिल हैं. इसी तरह दरभंगा स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के तहत भी चार प्रमुख जिले आते हैं. इन जिलों में दरभंगा, समस्तीपुर, मधुबनी और बेगूसराय के नाम शामिल हैं, जहां आगामी चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है.

कोसी क्षेत्र का विशाल दायरा

कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का दायरा सबसे बड़ा है, जिसके अंतर्गत कुल 14 जिलों के मतदाता वोट करते हैं. इसमें पूर्णिया, अररिया, कटिहार, किशनगंज, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, भागलपुर, बांका, मुंगेर, लखीसराय, शेखपुरा, जमुई एवं खगड़िया शामिल हैं.

विधान परिषद के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के वोटर बांकीपुर की तरह गलती नहीं करेंगे. एनडीए एकजुट हैं और हमारे उम्मीदवार टेस्टेड हैं. उन्होंने अपने क्षेत्र में काम करके दिखाया है.”- पंकज सिंह, भाजपा प्रवक्ता

विधानसभा चुनाव के बाद का परिदृश्य

वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों को आधार मानें तो राज्य में एनडीए का भारी दबदबा दिखाई देता है. कुल 243 विधानसभा सीटों में से एनडीए ने 202 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी. हालांकि, बांकीपुर उपचुनाव में मिली अप्रत्याशित हार के कारण अब एनडीए का यह आंकड़ा घटकर 201 सीटों पर आ चुका है.

प्रशांत किशोर के लिए नई राह

एनडीए के इस भारी बहुमत के कारण महागठबंधन और प्रशांत किशोर के लिए यह लड़ाई बिल्कुल आसान नहीं है. लेकिन वर्तमान में यूजीसी (UGC) के फैसलों को लेकर अगड़ी जातियों के मतदाताओं में बीजेपी के खिलाफ जो भारी नाराजगी देखी जा रही है, उसका सीधा सियासी लाभ जन सुराज और प्रशांत किशोर को मिलने की पूरी संभावना है.

एक्सपर्ट ने क्या कहा?

बांकीपुर उपचुनाव जीतने के बाद प्रशांत किशोर अब पूरी ताकत से विधान परिषद की आठों सीट पर तैयारी कर रहे हैं. सभी जगह बैठक कर ली है और जल्द ही उम्मीदवार के नाम की घोषणा की बात कह रहे हैं. पार्टी के वरिष्ठ नेता सरवर अली का दावा है कि बांकीपुर की तरह जनता आठों विधान परिषद का चुनाव जीताएगी. वहीं राजनीतिक विशेषज्ञ प्रवीण बागी का कहना है कि स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में वाटर सीमित होते हैं, जो कैंडिडेट जितना वोटर बनता है जीत उसकी उतनी पक्की होती है.

“इस चुनाव में प्रशांत किशोर भी अपनी ताकत दिखाएंगे और इसलिए एनडीए खेमे में बेचैनी है. खासकर अनंत सिंह ने नीरज कुमार के खिलाफ जिस प्रकार से उम्मीदवार की घोषणा कर दी है, उससे जदयू की मुश्किलें बढ़ गई है. अब देखना है कि जो सीटिंग एमएलसी है अपनी सीट बचा पाते हैं या नहीं या फिर प्रशांत किशोर की चाल में फंसते हैं.”- प्रवीण बागी, राजनीतिक विशेषज्ञ

शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों का गणित

बिहार विधान परिषद चुनाव में मतदाता बेहद सीमित हैं. पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में कुल 16,689 मतदाता पंजीकृत हैं, जो इस वर्ग में सर्वाधिक हैं. इसके बाद सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में कुल 10,800 वोटर्स शामिल हैं. इन दोनों ही क्षेत्रों में चुनावी मुकाबला बेहद कड़ा और दिलचस्प होने की उम्मीद जताई जा रही है.

तिरहुत और दरभंगा की स्थिति

शिक्षक वर्ग के अन्य दो क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या अपेक्षाकृत कम है. तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में 9,204 वोटर पंजीकृत हैं, जबकि दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या मात्र 8,967 है. कम मतदाता होने के कारण इन सीटों पर उम्मीदवारों के लिए एक-एक वोटर्स से सीधा संपर्क साधना काफी आसान हो जाता है.

स्नातक क्षेत्रों में मतदाताओं का दबदबा

स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में वोटरों की संख्या शिक्षक वर्ग से काफी अधिक है. तिरहुत स्नातक क्षेत्र 1.35 लाख मतदाताओं के साथ सबसे बड़ा निर्वाचन क्षेत्र बना हुआ है. वहीं, कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भी 1.34 लाख मतदाता हैं. इतनी बड़ी मतदाता संख्या के कारण इन सीटों पर उम्मीदवारों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी.

दरभंगा और पटना का वोट बैंक

दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में कुल 1.27 लाख मतदाता पंजीकृत हैं, जो चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाएंगे. सबसे अंत में पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में 88,000 वोटर शामिल हैं. स्नातक सीटों पर बड़ी संख्या में युवा और प्रबुद्ध वर्ग के मतदाता होने के कारण राजनीतिक दलों को अपनी रणनीति पूरी तरह बदलनी होगी.

पटना स्नातक सीट पर कड़ा मुकाबला

पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र पर लंबे समय से जदयू और बीजेपी का कब्जा रहा है, जिस पर इस बार सबकी निगाहें टिकी हैं. इस सीट से जदयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार लगातार तीन बार चुनाव जीत चुके हैं. इस बार वह चौथी बार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, लेकिन मोकामा के पूर्व विधायक अनंत सिंह ने उनकी मुश्किलें काफी बढ़ा दी हैं.

अनंत सिंह का बड़ा सियासी दांव

अनंत सिंह ने नीरज कुमार के खिलाफ अनुज सिंह को मैदान में उतार दिया है. अनुज सिंह पहले जन सुराज के टिकट पर नवादा से विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं. चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की पार्टी की नजर भी इस बार अनुज सिंह पर बनी हुई थी. इस अप्रत्याशित त्रिकोणीय समीकरण ने पटना स्नातक क्षेत्र की इस पारंपरिक लड़ाई को बेहद दिलचस्प बना दिया है.

नीरज कुमार का बड़ा दावा

इस बड़ी चुनौती के बीच जदयू प्रत्याशी नीरज कुमार ने 88,000 कुल मतदाताओं में से 64,000 वोटर खुद बनाने का मजबूत दावा किया है. राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इनमें से अधिकांश वोट नीरज कुमार के पक्ष में पोल हो जाते हैं, तो उनकी जीत पूरी तरह पक्की है. हालांकि, पार्टी के भीतर से मिल रही अंदरूनी चुनौती अभी भी बनी हुई है.

भीतरघात को रोकने की कोशिशें

नीरज कुमार को अपनी ही पार्टी के अंदर से मिल रही चुनौतियों के बाद जदयू के बड़े नेता डैमेज कंट्रोल में जुट गए हैं. अनंत सिंह के साथ हुई अहम बैठक के बाद नीरज कुमार ने मीडिया से कहा कि पार्टी के अंदर कहीं कोई विवाद नहीं है. उन्होंने दावा किया कि एनडीए के सभी नेता और कार्यकर्ता इस चुनाव में पूरी तरह एकजुट हैं.

नवल यादव की मजबूत दावेदारी

दूसरी तरफ पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से पांच बार चुनाव जीत चुके भाजपा के नवल यादव इस बार भी चुनाव मैदान में है और जीत के प्रति इस बार भी आश्वस्त हैं. नवल यादव शिक्षकों में लोकप्रिय हैं और बड़ी संख्या में इस बार भी वोटर बना रखा है. उनके लिए राजद के तरफ से भी चुनौती आने वाली है. जो चर्चा है जदयू के पूर्व विधायक डॉक्टर संजीव राजद के टिकट पर पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव लड़ सकते हैं. हालांकि अभी आधिकारिक रूप से घोषणा नहीं हुई है और प्रशांत किशोर भी उम्मीदवार देंगे ऐसे में लड़ाई कांटे की हो सकती है.

महागठबंधन की है दो सीट

विधान परिषद के 8 सीटों में से दो सीट महागठबंधन के पास है. दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र और तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र दोनों पर महागठबंधन का फिलहाल कब्जा है. हालांकि 8 सीटों में राजद के पास एक भी सीट नहीं है. दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा एक बार फिर से चुनाव प्रचार में अपनी ताकत झोंक दी है. मदन मोहन झा को विश्वास है कि महागठबंधन के तरफ से दूसरा कोई उम्मीदवार खड़ा नहीं होगा, लेकिन प्रशांत किशोर की तरफ से उम्मीदवार दिए जाने से सशंकित हैं क्योंकि एनडीए के तरफ से पहले से ही चुनौती मिल रहा है.

तिरहुत सीट पर भाकपा की साख

वहीं, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के एकमात्र विधान पार्षद संजय सिंह तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से चुनावी मैदान में हैं. वह साल 2014 और 2020 में यहां से चुनाव जीत चुके हैं. अब वह तीसरी बार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, लेकिन उन्हें महागठबंधन के अंदरूनी बागियों और एनडीए से कड़ी टक्कर मिल रही है.

PK के लिए बड़ा मौका

इस बार महागठबंधन के लिए अपनी दोनों शिक्षक निर्वाचन सीटें बचाना एक बेहद कठिन और दिलचस्प चुनौती बन गया है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दरभंगा और तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में प्रशांत किशोर की पार्टी के लिए बेहतरीन मौका है, क्योंकि स्थानीय मतदाताओं की मौजूदा नाराजगी का सीधा फायदा उन्हें मिल सकता है.

JDU ने दिया मौका

वहीं तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में अभिषेक झा को जदयू ने एक बार फिर से मौका दिया है. पिछली बार उपचुनाव में शिक्षक नेता बंशीधर बृजवासी ने जीतकर सबको चौंका दिया था. इस बार भी चुनाव मैदान में हैं. प्रशांत किशोर की पार्टी के लिए यह सीट भी महत्वपूर्ण है और यहां भी उनके लिए अच्छा मौका है और वोटरों के लिए विकल्प बन सकते हैं. प्रशांत किशोरी यहां बैठक भी कर चुके हैं.

आफाक अहमद को PK दे सकते हैं मौका

सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में प्रशांत किशोर की पार्टी जान स्वराज के समर्थन से आफाक अहमद उपचुनाव जीते थे. प्रशांत किशोर यहां भी बैठक कर चुके हैं. हालांकि उम्मीदवार के नाम की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन चर्चा है कि आफाक अहमद को प्रशांत किशोर फिर से मौका दे सकते हैं.

दरभंगा स्नातक का चुनाव भी होगा दिलचस्प

2020 में भाजपा समर्थित सर्वेश कुमार निर्दलीय चुनाव जीते थे. जदयू के दिलीप कुमार चौधरी दूसरे स्थान पर रहे थे. दरभंगा शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में एनडीए के लिए चुनौती बढ़ सकती है. यहां भी एनडीए के बागी उम्मीदवार का खतरा है. ऐसे में प्रशांत किशोर को यहां भी लाभ मिल सकता है.

बांकीपुर जीतने के बाद जन सुराज में उत्साह

बांकीपुर चुनाव जीतने के बाद प्रशांत किशोर के तेवर बदले हुए हैं. प्रशांत किशोर सभी आठ स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में जाकर बैठक कर चुके हैं और जल्द ही उम्मीदवार के नाम की घोषणा करेंगे. एक तरह से प्रशांत किशोर ने चुनाव प्रचार खुद अपने हाथों में ले ली है.

कौन बनेगा सिकंदर?

दूसरी तरफ है एनडीए के घोषित उम्मीदवारों ने भी जोर-जोर से प्रचार शुरू कर दिया है क्योंकि वोटरों की संख्या सीमित होती है, लेकिन कई जिला होने के कारण उम्मीदवारों के लिए चुनाव आसान नहीं है. एक तो इस बार वोटर भी कम बने हैं और सबसे वोट करवाना भी एक बड़ा चैलेंज है. धन बल और संसाधन का इस्तेमाल जो जितना करेगा उसके जीतने की संभावना उतनी अधिक रहेगी. इस मामले में कोई किसी से पीछे नहीं रहना चाह रहा है. सब की तैयारी है. अब देखना है कौन बाजी मारता है और वोटर किस पर विश्वास करते हैं.

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